नीतिमञ्जरी (द्वाद्विवेद-कृत) : Nitimanjari
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| Author | Jitendra Kumar Tiwari |
|---|---|
| Edition | 2006 |
| Language | Sanskrit, Hindi |
| Pages | 142 |
| Cover | Hardbound |
| ISBN | 978-81-7702-081-1 |
| Publusher | Pratibha Prakashan |
Categories: Vedas, Vedic Literature
Tags: Indian Philosophy, Niti, Reference Work, Sanskrit, Veda
पुस्तक परिचय
प्रस्तुत ग्रन्थ नीतिपरक प्रबोधक श्लोकों का एक सुन्दर गुच्छक है। यह आचार्य क्षेमेन्द्र की ‘चारुचर्या’, आचार्य गोमिनी के ‘उपदेश-शतक’ के समान है। इसका आधार ऋग्वेदीय ऋचाओं, ब्राह्मण-ग्रन्थों एवं नैतिक सूत्रों में निहित है। ‘नीतिमञ्जरी’ जनजीवन में नैतिकता एवं आचार-प्रवणता की आकांक्षा जगाने की दृष्टि से अत्यधिक उपादेय है। इसके माध्यम से लोगों को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गयी है। इस प्रकार प्रस्तुत कृति सामान्य अध्येताओं और प्रबुद्धजनों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
About the Author
डॉ० जितेन्द्र कुमार तिवारी पं० श्री पुत्तनलाल तिवारी के पुत्र हैं, जिनका जन्म 5 मार्च 1971 को हरदोई (उ०प्र०) में हुआ। इन्होंने एम०ए० (वेद) प्रथमश्रेणी तथा पी-एच०डी० की उपाधि लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से प्राप्त की। सन् 1997 ई० से जून 2002 तक ये निरन्तर प्राध्यापक, संस्कृत-विभाग, श्री गाँधी परास्नातक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सिधौली, सीतापुर (उ०प्र०) में कार्यरत रहे। ये “नवपारिजातम्” शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संस्थान, लखनऊ के उपाध्यक्ष तथा “खण्डेलवाल जैन हितैषु” त्रैमासिक पत्रिका के सहसम्पादक रहे हैं। इन्हें उर्दू तथा बङ्ला भाषा का सम्यक् ज्ञान तथा कम्प्यूटर का अपेक्षित कार्यसाधक ज्ञान है। इनके विभिन्न साहित्यिक-सांस्कृतिक सुप्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अभिनव कथ्यसंवलित उपादेय गवेषणापूर्ण शोधलेख प्रकाशित हैं। वर्तमान में ये शोध-सहायक पद पर, महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जयिनी (म०प्र०) में कार्यरत हैं।
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