जैमिनीयोपनिषद् ब्राह्मण में निहित दार्शनिक सिद्धान्त : Jaiminiyopanishad Brahman mein Nihit Darshanik Siddhant
₹595.00 Original price was: ₹595.00.₹450.00Current price is: ₹450.00.

| Author | Roop Kishor Shastri |
|---|---|
| Edition | 2001 |
| Language | Hindi, Sanskrit |
| Pages | 224 |
| Cover | Hardbound |
| ISBN | 978-81-7702-046-3 |
| Publusher | Pratibha Prakashan |
Categories: Vedas, Vedic Literature
Tags: Indian Philosophy, Reference Work, Sanskrit, Veda, Vedic Studies
पुस्तकीयम्
सामवेदीय शाखा के उपलब्ध ब्राह्मणग्रन्थों में जैमिनीयोपनिषद् ब्राह्मण विविध विषय विवेचना की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ब्राह्मण ग्रन्थ है। महर्षि जैमिनी इसके प्रधान आचार्य रहे हैं। गायत्र, गायत्री का इसमें विस्तृत विवेचन होने के कारण यह ‘गायत्रुपनिषद् ब्राह्मण’ और ‘तलवकार ब्राह्मण’ इस अन्य नाम से भी जाना जाता रहा है। इसी सामवेदीय ब्राह्मण को लक्ष्यकर “जैमिनीयोपनिषद् ब्राह्मण में निहित दार्शनिक सिद्धान्त” नामक ग्रन्थ की सर्जना की गयी है।
इसमें आध्यात्मिक एवं दार्शनिक मूलबिन्दुओं व सिद्धान्तों के बाहुल्यस्वरूप इसका शोधपरक चिन्तन प्रस्तुत किया गया है। सृष्टिविषयक तत्त्वों के अन्तर्गत सृष्टि की कारणावस्थाओं, सृष्टिगत यज्ञीयावधारणा, सृष्टि-प्रक्रिया व उससे पूर्व की अवस्थाओं तथा प्रजापति का विससृक्षत्वाद इस मूलभूत निहित दार्शनिकता का प्रतिपादन इसमें किया गया है, वहीं पर वैदिक चिन्तन को पर्याप्त आयाम देने वाली दिव्य-शक्ति की अवधारणा का वैशिष्ट्य दृष्टिगोचर है। आत्मतत्त्व मीमांसा, परलोक, स्वर्गनरक, पितृयान-देवयानादि मार्ग, दैवी संसद् आदि चिन्तन की अपनी शैली में रोचक व ज्ञानवर्धक प्रस्तुति है।
इस ब्राह्मण में प्रमुख शोध तथ्य व तत्त्व तो गायत्र, गायत्री, ओंकार, उद्गीथ, उक्थ, सप्तविध साम, स्तोम, सामगत भक्तिविधा, वाक्, प्राण तथा साम का सप्तविध मिथुनत्व, मर्त्यामर्त्य का ज्ञेयत्व, एतत्सम्बन्धि अनुभव, आन्तरीय रहस्य, मुक्ति व अमृतत्व विषयक अवधारणा ही है जो दार्शनिक आध्यात्मिक दृष्टि से सुतराम नूतन दिशाबोधक विश्लेषणपरक शोध की अपेक्षा से प्रस्तुत है।
About the Author
डॉ० रूप किशोर शास्त्री
जन्म – 19-12-1957
जन्म स्थान – इछावरी, डिबाई, बुलन्दशहर (उ०प्र०)
योग्यता – एम०ए०, एम० फिल्०, पी-एच०डी०
व्यवसाय – अध्यापन, वेद विभाग, गुरुकुल काङ्गड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
प्रमुख लेखन कार्य: सामवेदीय ब्राह्मण-दार्शनिक अध्ययन; जैमिनीयोपनिषद् ब्राह्मण में निहित दार्शनिक सिद्धान्त; वैदिक वाङ्मय-निर्वचन कोष:; दयानन्द निरुक्ति-व्युत्पत्ति कोष:; धर्म दर्शन संस्कृति; वैदिक मैरिज प्रोसीजर; वैदिक विवाह; वैदिक संध्या यज्ञीयम्; वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप (सम्पा०); वैदिक वाङ्मय-प्रायश्चित्त धर्म मीमांसा एवं दण्ड-विधान; बृहद् वेदभाष्य निरुक्ति-व्युत्पत्ति कोष:; संहितासु निर्वचनमूलम्, तथा अन्य अनेक ग्रन्थ।
इन्होंने देश-विदेश के दशाधिक पी-एच०डी० छात्रों को शोध निर्देशन दिया है। उ०प्र० राज्यपाल द्वारा उ०प्र० संस्कृत संस्थान लखनऊ के लिए तीन वर्ष तक के लिए मनोनीत सदस्य रहे हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं में विषय विशेषज्ञ, विभिन्न देशों की यात्रा तथा अनेक अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय सम्मेलनों की अध्यक्षता, व्याख्यान एवं भाग लिया है। आकाशवाणी पर अनेक बार व्याख्यान तथा वार्ताएं दी हैं। 3.6.2001 को मुख्यमन्त्री, उत्तराञ्चल सरकार द्वारा ‘साहित्यमहोपाध्याय’ सारस्वत सम्मान से सम्मानित हुए हैं।
Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.
Related products
Culture
Reference Work
Reference Work
History
Ancient Indian History















Reviews
There are no reviews yet.