
भारतीय शास्त्रीय संगीत: मनोविज्ञानिक आयाम: Bharatiya Shastriya Sangeet: Manovaigyanik Ayam
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| AUTHOR | Dr. Sahitya Kumar Nahar |
|---|---|
| Edition | 1999 |
| LANGUAGE | Hindi |
| Pages | |
| BINDING | Hardbound |
| ISBN | 8185268908 |
| PUBLISHER | Pratibha Prakashan |
Categories: Indian Music, Reference Work
Tags: culture, Hindi, Indian Philosophy, Music
पुस्तक परिचय
प्रस्तुत ग्रन्थ “भारतीय शास्त्रीय संगीत: मनोवैज्ञानिक आयाम” लेखक की वैज्ञानिक जिज्ञासावृत्ति एवं सांगीतिक मनोवृत्ति का मणि-कंचन संयोग रूप है। संस्कृति एवं सभ्यता के अभिन्न अंग के रूप में संगीतकला का ललितकलाओं में श्रेष्ठ स्थान है। इसका आध्यात्मिक स्वरूप देवी-देवताओं से सीधे संबंधित होने के कारण इसे न केवल ईश्वर आराधना का सबसे सबल माध्यम ही माना जाता है अपितु निराकार ब्रह्म के रूप स्वर (नाद) को ईश्वर का रूप भी कहा जाता है।
वैदिक काल से उद्भावित होकर भारतीय संगीत विभिन्न कालों में पुष्पित, पल्लवित एवं परिष्कृत होता हुआ आधुनिक काल तक आ पहुंचा है, जहाँ इसके शिक्षण में ‘गुरु-शिष्य परम्परा’ के साथ-साथ संस्थागत शिक्षण का काफी विकास हुआ है। दूसरी ओर मन-मस्तिष्क से सीधे जुड़े रहने के कारण यह मनोविज्ञान तथा कुछेक मनोवैज्ञानिक तथ्यों एवं सिद्धान्तों से न केवल जुड़ा ही है, अपितु प्रभावित भी होता रहता है।
प्रस्तुत पुस्तक में संगीत के प्रत्येक अंग यथा शिक्षण, अभ्यास, प्रदर्शन इत्यादि को मनोवैज्ञानिक तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में देखने तथा उन सिद्धान्तों के आधार पर इसे और भी सुव्यवस्थित एवं सुनियोजित ढंग से करने के विविध पहलुओं पर सम्यक् विचार किया गया है। क्योंकि संगीत में विभिन्न मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त यथा – मन, बुद्धिमत्ता, स्मृति, व्यक्तित्व, सीखना… इत्यादि कुछ सीमा तक स्वतः ही प्रयुक्त होते हैं और यदि कलाकार, शिक्षक एवं विद्यार्थी द्वारा उन सिद्धान्तों के परिप्रेक्ष्य में अपनी संगीत साधना का क्रम क्रियाशील रखा जाये तो बेहतर परिणाम प्राप्त होने की संभावनायें प्रबल हो जाती हैं।
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