आर्य एवं आर्य संस्कृति : Arya evam Arya Sanskriti
₹395.00 Original price was: ₹395.00.₹325.00Current price is: ₹325.00.

| Author | Virendra Chandra Soti |
|---|---|
| Edition | 2006 |
| Language | Hindi |
| Pages | 136 |
| Cover | Hardbound |
| ISBN | 978-81-7702-117-6 |
| Publusher | Pratibha Prakashan |
Categories: Vedas, Vedic Literature
Tags: Aryan History, Indian History, Indology, Sanskrit, Veda, Vedic Studies
पुस्तक परिचय
ऋग्वेद सहित समस्त वैदिक मन्त्र संहिताओं, ब्राह्मण-ग्रन्थों, आरण्यकों एवं उपनिषदों में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि आर्यजन कहीं बाहर से आये। सम्पूर्ण वैदिक साहित्य इसी तथ्य की पुष्टि करता है कि आर्य मूलत: भारत के ही सप्त-सैन्धव प्रदेश के निवासी थे और इसी प्रदेश से उनकी सभ्यता का विस्तार सम्पूर्ण भारतवर्ष में हुई।
उस समय के भारत की भौगोलिक स्थिति आज से बहुत व्यापक थी। सरस्वती जैसी विशाल नदी लुप्त हो गयी। राजस्थान के बहुत से भूभाग में उस समय विद्यमान समुद्र सूख गया। इस ग्रन्थ में लेखक ने आर्य शब्द को गुण वाचक विशेषण के रूप में ग्रहण किया है। प्रस्तुत ग्रन्थ में आर्य और उनकी संस्कृति के विषय में व्यापक नवीनतम विचारों को समाहित कर एक नई दिशा देने का अनुसंधानात्मक प्रयास किया गया है।
About the Author
10 जून 1929 को बदायूँ के एक आस्थावान् वैदिक परिवार में जन्मे श्री वीरेन्द्र चन्द्र सोती को वैदिक परम्परा के संस्कार और उसकी गहरी समझ बाल्यकाल में ही प्राप्त हो गये। पंजाब, इलाहाबाद और लखनऊ के विश्वविद्यालयों में उन्होंने इतिहास में एम.ए. और पत्रकारिता की उपाधियाँ प्राप्त कीं। वैदिक वाङ्मय उनके अध्ययन का सदैव प्रमुख विषय रहा।
राजकीय कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ (उ.प्र. शासन एवं लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध) के राजपत्रित रजिस्ट्रार तथा वृन्दावन शोध संस्थान (उ.प्र. शासन) के प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर दीर्घकालीन सेवा से निवृत होने के बाद उन्होंने निरन्तर अध्ययन और लेखन में अपने को संलग्न रखा। उनके प्रमुख प्रकाशित ग्रन्थ ये हैं- भारतीय संस्कृति के मूल तत्त्व; भारतीय संस्कृति की सुगन्ध; रुद्राक्ष-महात्म्य; भारतीय राष्ट्रीय एकता; हाकी सम्राट् ध्यानचन्द; भारतीय संस्कृति में स्त्रियों की स्थिति; भारतीय संस्कृति में सर्वधर्मसमभाव।
केन्द्रीय सरकार ने ‘भारतीय संस्कृति के मूलतत्त्व’ ग्रन्थ पर उन्हें तीस हजार रु० के पुरस्कार से पुरस्कृत किया। ‘भारतीय राष्ट्रीय एकता’ पुस्तक पर भी उन्हें केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (प्रथम) पुरस्कार प्रदान किया। उनके अनेक लेख भी समय-समय पर पुरस्कृत हुए हैं।
Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.
Related products
Indian Philosophy
Ancient Indian History
Reference Work
History
Reference Work
Ancient Indian History
Aesthetics
Indian Philosophy


वैदिक वाङ्ग्मय की विस्तृत रूपरेखा : Vedic Vangmay Ki Vistrit Ruprekha
वेदान्तकारिकावली (विशिष्टाद्वैत-वेदान्त-प्रवेशिका) - Vedantkarikavali
Creation and Existence in Indian Tradition
वैदिक विज्ञान परम्परा - Vedic Vigyan Parampara 













Reviews
There are no reviews yet.