वैदिक यज्ञ प्रतीकात्मक मीमांसा : Vedic Yajna Pratikatmak Mimansa
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The symbolism of Vedic Yajna
| Author | Suman Sharma |
| Edition | 2012 |
| ISBN | 9788177022881 |
| Pages | 204 |
| Binding | Hardbound |
Categories: Tantra Studies, Vedas
Tags: Hindi, Mimansa, Veda, vedas, Vedic Studies
पुस्तक परिचय
वेद विश्व-साहित्य की सर्वोत्कृष्ट निधि है। वेद ही समग्र भारतीय चिन्तन और धर्माचरण का मूल है।
वेद में स्तुत देवता सर्वव्यापी परमात्मशक्ति की विभिन्न अभिव्यक्तियों के प्रतीक हैं, जिनके माध्यम से भारतीय मनीषियों एवं साक्षात्कृतधर्मा ऋषियों ने सृष्टि के गूढ़ रहस्यों को समझाने का प्रयत्न किया है। वेदों में आधुनिक भारतीय भाष्यकारों, वैदिक विज्ञान और गणित, सामगान की प्रक्रिया, वैदिक काव्य के सौन्दर्य, दार्शनिक तत्त्वज्ञान, भक्तिभावना, ब्राह्मणग्रन्थों, आरण्यकों, श्रौतसूत्रों और वैदिक यज्ञों पर इसमें नवीन, विशिष्ट और विस्तृत सामग्री का समावेश है।
वैदिक यज्ञों की दो प्रमुख श्रेणियाँ हैं – श्रौतयाग और गृह्ययाग। श्रौतयज्ञों में निहित प्रतीकात्मक अर्थवत्ता का स्थान स्थूल रूढ़ियों ने ले लिया। वस्तुतः इन यज्ञों की योजना ऋषियों ने मानवजीवन के समानान्तर की थी।
प्रस्तुत ग्रन्थ में यज्ञों की प्रतीकात्मक व्याख्या, यज्ञ शब्द का अर्थ, तत्त्व विकास, यज्ञों में अग्निचयन, पर्याय एवं मिश्रित प्रतीक, वैदिक यज्ञ और उनके आधुनिक प्रतीक, यज्ञों की संख्या, यज्ञों के प्रतीक, प्रतीकों का महत्त्व, प्राचीन व आधुनिक प्रतीक, प्रतीकों की वैज्ञानिकता, यज्ञ एक प्रतीकात्मक क्रिया आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया है।
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