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महाभारत की प्राचीन कथाएँ : Mahabharat ki Prachin Kathayen
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| Author | Subhash Vidyalankar |
|---|---|
| Edition | 2016 |
| Language | Hindi |
| Pages | 370 |
| Cover | Hardbound |
| ISBN | 978-93-85538-13-1 |
| Publusher | Pratibha Prakashan |
Category: Literature
Tags: Classics, Hindi, Indian History, Indology, Purana, Sanskrit
संसार के कथा साहित्य के सर्वप्रथम स्रोत वेद हैं। वेदों में आख्यान और सम्वाद शैलियों का विशेष स्थान है। वैदिक अध्यात्म संकेतों की व्याख्या पुराणों की कथाएं हैं। आर्यों का विराट् गाथा-वाङ्मय महाभारत में उपलब्ध है। लोक परम्परा में चले आ रहे समाज का इतिहास इन आख्यानों में सुरक्षित है।
महाभारत में प्राप्त वैदिक आख्यानों और ऐतिहासिक कथाओं का संकलन इस ग्रन्थ में किया गया है। इस प्रकार का कथा संग्रह इतने बड़े पैमाने पर सम्भवत: पहली बार किया गया है। प्रत्येक कथा की समाप्ति पर सम्बद्ध पर्व और अध्याय का भी उल्लेख कर दिया गया है ताकि सन्दर्भ ढूंढने में कठिनाई न हो।
गरुड़ोपाख्यान, इन्द्र-वृत्रासुर युद्ध जैसे महत्वपूर्ण अनेक वैदिक आख्यान और सरमा का शाप, आज्ञापालन, उत्तंक और तक्षक नाग, राजा वसु उपरिचर, समुद्र-मन्थन, प्रजापति की कन्याएं कद्रू और विनता, जरत्कारु मुनि और आस्तीक, दुष्यन्त और शकुन्तला, कच-देवयानी, महाराज ययाति, इन्द्र और अष्टक, महर्षि माण्डव्य और धर्मराज, नहुष का स्वर्गपतन, पतिव्रता उपाख्यान, नल-दमयन्ती, सावित्री-सत्यवान, तुलाधार-जाजलि, गौतमी, सांप और काल, उशीनर और शरणागत कबूतर, श्वेतकेतु और सुवर्चला आदि १७० से भी अधिक प्राचीन कथाएं इस संग्रह में समाविष्ट हैं।
रत्नों की खान महाभारत के ये आख्यान और कथाएं समाज के दिग्दर्शन के लिये और व्यक्ति के चरित्र निर्माण में उपयोगी और सामयिक हैं।
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