ऐतिहासिक दृष्टि से पर्यटन का उद्भव जहाँ मानव की उदर पूर्ति तथा दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ा रहा, वहीं धीरे-धीरे यह मानव के मनोरंजन, मानसिक शांति, रोमांस प्राप्त करने की लालसा आदि से जुड़ता गया और कालांतर में पर्यटन बहुआयामी रूप में प्रचलित हो गया वर्तमान में पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन के विविध पक्षों से जड़ा हुआ है। अभिव्यक्ति मनोरंजन, व्यापार, रोजगार, व्यावसायिक गतिविधियों आदि उद्देश्य से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करता रहता है। इससे न केवल उसे अपने लक्ष्यों की पूर्ति होती है, बल्कि उसे मानसिक शांति, कुछ समय के लिए अपनी दैनिक चिंताओं से मुक्ति, जीवन में नवीनता आदि का अनुभव भी प्राप्त होता है। इन सभी विविधताओं से पर्यटन के अनेक प्रकार स्पष्ट होते हैं।
पर्यटन से हमें विभिन्न पर्यटन स्थलों के इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है और जब सम्बन्धित स्थल का इतिहास जानते हैं तो हम कुछ देर के लिए स्वयं को उस इतिहास का हिस्सा समझने लगते हैं, इससे हमें स्वयं को उस स्थल के अतीत से जोड़ने में अभूतपूर्व आनंद की अनुभूति होती है और हमारा मन प्रसन्न हो जाता है। हम कुछ देर के लिए अपनी दैनिक दिनचर्या की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। और सम्बन्धित स्थल के अतीत में खो जाते हैं। इस प्रकार के अनुभवों से हमारे अंदर सामाजिक गुणों का विकास तथा मानवीय संवेदनाओं का विकास होता है और सही दृष्टि से हम एक सहिष्णु, करूणा, दया, सहानुभूति आदि गुणों से युक्त एक मानव बन जाते हैं। पर्यटक स्थल के इतिहास से हमें विश्व की कई प्रमुख सभ्यताओं, नगरीय विकास, युद्धों, कला के विविध रूपों जैसे चित्रकला, स्थापत्य, मूर्तियों आदि की भी जानकारी मिलती है, जिससे हमें मानव जीवन के विविध पक्षों का ज्ञान होता है। इन्हीं तथ्यों के अलोक में इस पुस्तक की रचना की गई है। आशा है विद्यार्थियों, अध्येताओं तथा पर्यटकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपादेय होगी।


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