ब्राह्मण ग्रन्थों में आचार दर्शन : Brahman Granthon mein Achar Darshan
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| Author | Pragya Pandey |
|---|---|
| Edition | 2006 |
| Language | Hindi |
| Pages | 318 |
| Cover | Hardbound |
| ISBN | 978-81-7702-083-6 |
| Publusher | Pratibha Prakashan |
Categories: Vedas, Vedic Literature
Tags: Indian Philosophy, Reference Work, Sanskrit, Veda, Vedic Studies
पुस्तक परिचय
भारतीय परम्परा के अनुसार ज्ञान की परिणति सदाचार में होती है। इसी विचार-बिन्दु को ध्यान में रखकर इस ग्रन्थ में ऐतरेय, कौषीतकि, शतपथ, तैत्तिरीय, ताण्ड्य, षड्विंश, सामविधानादि तथा गोपथ ब्राह्मण में निहित आचार-चेतना तथा नैतिकता जन्य मूल्यों की प्रस्तुति अत्यन्त प्रामाणिकता से की गई है। पश्चिमी विद्वानों की वे अवधारणाएँ इससे स्वतः निरस्त हो जाती हैं, जिनमें कहा गया है कि ब्राह्मणग्रन्थों में नैतिक चेतना का अभाव है। लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो० अशोक कुमार कालिया के अनुसार इस ग्रन्थ का प्रणयन अत्यन्त परिश्रम-पूर्वक किया गया है।
About the Author
28 जुलाई 1976 को जन्मी डॉ० प्रज्ञा पाण्डेय ने प्राचीन और आधुनिक उभय पद्धतियों से संस्कृत और वैदिक वाङ्मय की शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की है। लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने एम.ए., पी-एच.डी. और साहित्याचार्य की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। एम.ए. (संस्कृत, वेद वर्ग) में विश्वविद्यालय-भर में सर्वप्रथम स्थान पाने पर उन्हें ‘राजा सर हरनामसिंह- सर हरकोर्ट बटलर’, ‘कुमारी विमला पुरी’, ‘श्रीमती चन्द्रकली पाण्डेय मेमोरियल’ एवं ‘श्रीमती चन्द्रादेवी-राधाकृष्ण अरुणवंशी’ नामक चार स्वर्णपदक तथा श्रीमती इन्द्राणी देवी तिवारी मेमोरियल कैश प्राइज मिले हैं। उन्होंने विश्व संस्कृत सम्मेलन, बंगलौर-सहित अनेक सम्मेलनों और परिसंवादों में भाग लिया है।
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