वैदिक साहित्य में उपनिषदों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। सभी उपनिषदें ब्रह्मविद्या का प्रतिपादन करती हैं। इनमें वेद मन्त्रों के गूढ़ अर्थों की व्याख्या की गई है। प्रत्येक उपनिषद किसी न किसी वेद से सम्बद्ध है। जिनका पूरा विवरण इस ग्रन्थ की भूमिका में दिया गया है।
प्रस्तुतग्रन्थ उपनिषद् रत्नमञ्जूषा में ईश, केन, कठ आदि ग्यारह मुख्य उपनिषदों के अतिरिक्त योग से सम्बद्ध बीस उपनिषदों की सूक्तियों का भी संग्रह प्रस्तुत किया गया है। मुझे आशा है कि आध्यात्मिक ज्ञान के जिज्ञासुओं और सामान्य जनों के लिये यह संग्रह मार्गदर्शन करने में उपयोगी होगा।











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