पुस्तक परिचय
प्रस्तुत ग्रन्थ ‘पौष्पी नव्यसिद्धान्तकौमुदी’ का प्रथम भाग है, जो पाणिनीय शब्दसिद्धि-प्रक्रिया को सरल एवं सुबोध रूप में प्रस्तुत करता है। भगवान् पाणिनि द्वारा प्रतिपादित सामान्य-विशेष लक्षणों से युक्त प्रत्येक पदपाठ की सिद्धि हेतु धात्वादेशकप्रक्रिया, सुबन्तप्रक्रिया, तद्धितप्रक्रिया तथा स्वरप्रक्रिया इन चार प्रक्रियाओं का विवेचन इसमें निहित है। सिद्धान्तकौमुदी आदि प्रचलित प्रक्रियाग्रन्थों की शैली का अनुसरण करते हुए यह ग्रन्थ शब्दसिद्धि के सामान्य-विशेष विधान को स्पष्ट करता है। लेखिका ने इसे राष्ट्रभाषा (हिन्दी) में ‘अष्टाध्यायी सहज बोध’ नाम से आठ भागों में तथा देवभाषा (संस्कृत) में ‘पौष्पी नव्यसिद्धान्तकौमुदी’ नाम से भी आठ भागों में प्रकाशित किया है। इस प्रथम भाग में संज्ञा-प्रकरण का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रन्थ संस्कृत-व्याकरण के विद्यार्थियों, अध्येताओं तथा शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।














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