पुस्तक परिचय:
वैदिक वाङ्मय में अथर्ववेद का अत्यन्त विशिष्ट स्थान है। मानव जीवन से सम्बन्धित भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों विषयों से यह समन्वित है। इसी के धरातल पर न्याय-वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदान्त तथा चार्वाक, बौद्ध-जैन आदि भारतीय दर्शनों का विशद विवेचन किया गया है। माया, आत्मतत्त्व, ईश्वर, जीव-जगत, सृष्टि का विकास, पुनर्जन्म, बन्ध-मोक्ष जैसे बिन्दुओं का प्रस्तुत ग्रन्थ में डॉ० श्रीमती रस्तोगी ने सुविशद विवेचन अत्यन्त मनोयोग और अध्यवसायपूर्वक किया है।







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